रायपुर POCSO कोर्ट का अहम आदेश: छह आरोपियों को नोटिस जारी, 14 मई को होगी अगली सुनवाई

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सुनीता पांडेय की याचिका पर फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय की कार्रवाई, संज्ञान से पहले आरोपियों को जवाब देने का मौका


रायपुर, 6 मई 2026 | खबर36 वेब डेस्क

राजधानी रायपुर के चतुर्थ फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय (POCSO) ने एक महत्वपूर्ण मामले में छह आरोपियों को नोटिस जारी किया है। यह आदेश परिवादिनी सुनीता पांडेय द्वारा दायर परिवाद पत्र पर सुनवाई करते हुए पारित किया गया। सुनीता पांडेय, ‘बुलंद छत्तीसगढ़’ के संपादक मनोज पाण्डेय की पत्नी हैं।

यह परिवाद अधिवक्ता आशीष कुमार मिश्रा के माध्यम से न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था, जिसमें पुलिस विभाग से जुड़े छह व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है। आरोपियों में शंकर ध्रुव (सहायक उपनिरीक्षक, माना थाना), मुकेश सोरी (क्राइम ब्रांच रायपुर), सबूरी शंकर (ट्रांसजेंडर, क्राइम ब्रांच), मुनीर रज़ा (क्राइम ब्रांच), नीलम कुजूर (DD नगर थाना) और मुकेश बांधे (कांस्टेबल, DD नगर थाना) शामिल हैं।


गंभीर धाराओं में कार्रवाई की मांग

परिवाद पत्र में आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 की कई गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की गई है। इनमें धारा 324 (चोट पहुंचाना), 332 व 333 (लोक सेवक पर हमला), 294 (अश्लील कृत्य), 115(2), 127(2), 331(2), 135, 75(1)(w), 76 और 79 शामिल हैं।

इसके अलावा, POCSO एक्ट की धारा 12 (यौन उत्पीड़न) और किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 75 के तहत भी संज्ञान लेने का आग्रह किया गया है।


कोर्ट की टिप्पणी और कानूनी आधार

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 223(1) के तहत किसी भी मामले में संज्ञान लेने से पहले आरोपियों को सुनवाई का अवसर देना आवश्यक है। यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप है, जिसमें किसी भी पक्ष को बिना सुने निर्णय नहीं लिया जाता।

इसी प्रावधान का पालन करते हुए न्यायालय ने सभी छह आरोपियों को नोटिस जारी किए हैं। साथ ही, उन्हें परिवाद पत्र एवं संबंधित दस्तावेजों की प्रतियां उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि वे अपना पक्ष प्रभावी रूप से रख सकें।


अगली सुनवाई की तारीख तय

मामले की अगली सुनवाई 14 मई 2026 को निर्धारित की गई है। इस दौरान अदालत यह विचार करेगी कि प्रस्तुत आरोपों के आधार पर संज्ञान लिया जाए या नहीं। इससे पहले सभी आरोपियों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा।


न्यायालय का आदेश

यह आदेश 2 मई 2026 को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गिरीश कुमार मंडावी द्वारा जारी किया गया।


खबर36 विश्लेषण:
यह मामला इसलिए संवेदनशील और महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें कानून-व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। अब नजर 14 मई की सुनवाई पर रहेगी, जहां अदालत के समक्ष दोनों पक्षों की दलीलें सामने आएंगी और आगे की कानूनी दिशा तय होगी।


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