
राजनांदगांव | डोंगरगढ़
राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ स्थित आदिम जाति कल्याण विभाग के पोस्ट मैट्रिक अनुसूचित जाति बालक छात्रावास में कथित रूप से बिना अनुमति दर्जनों पेड़ों की कटाई का मामला सामने आया है। आरोप है कि तत्कालीन छात्रावास अधीक्षक आशीष भागड़कर ने विभागीय और राजस्व विभाग की आवश्यक स्वीकृति लिए बिना ही छात्रावास परिसर में लगे पेड़ों की कटाई करवा दी। मामले की शिकायत विभाग तक पहुंचने के बाद आदिम जाति कल्याण विभाग की सहायक आयुक्त दीक्षा गुप्ता ने जांच के आदेश देते हुए जांच टीम गठित कर दी है। अब विभाग की आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट पर निर्भर करेगी।
छात्रावास परिसर में पेड़ों की कटाई से उठे सवाल
जानकारी के अनुसार डोंगरगढ़ स्थित पोस्ट मैट्रिक अनुसूचित जाति बालक छात्रावास परिसर में वर्षों पुराने कई पेड़ों की कटाई कर दी गई। आरोप है कि इस कार्रवाई के लिए न तो वन विभाग अथवा सक्षम प्राधिकारी से अनुमति ली गई और न ही राजस्व विभाग से आवश्यक स्वीकृति प्राप्त की गई। यदि जांच में यह आरोप सही पाए जाते हैं तो यह सरकारी नियमों के उल्लंघन का गंभीर मामला माना जाएगा।
लकड़ी के उपयोग को लेकर भी सवाल
सूत्रों के मुताबिक कटे हुए पेड़ों की लकड़ी को प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास में ईंधन के रूप में उपयोग करने की तैयारी की गई थी। हालांकि विभाग की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। जांच के दौरान इस पहलू की भी पड़ताल की जाएगी कि लकड़ी का उपयोग किस उद्देश्य से किया जाना था और क्या इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया था।
छात्रों की शिकायत के बाद हरकत में आया विभाग
बताया जा रहा है कि छात्रावास के कुछ छात्रों ने पेड़ों की कटाई को लेकर आपत्ति जताते हुए शिकायत विभाग तक पहुंचाई। शिकायत मिलने के बाद आदिम जाति कल्याण विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया। सहायक आयुक्त दीक्षा गुप्ता ने तत्काल जांच टीम गठित कर निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं। विभाग का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
वर्तमान में अन्य छात्रावास में पदस्थ हैं अधीक्षक
जानकारी के अनुसार जिन तत्कालीन अधीक्षक आशीष भागड़कर पर पेड़ों की कटाई कराने का आरोप है, वे वर्तमान में कोठीटोला छात्रावास में पदस्थ हैं। जांच में यदि उनकी भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ विभागीय नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा गंभीर मामला
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी परिसरों में स्थित पेड़ों की कटाई के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होता है। बिना अनुमति पेड़ों की कटाई न केवल पर्यावरण संरक्षण से जुड़े नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सरकारी संपत्ति के संरक्षण से जुड़े प्रावधानों के विपरीत भी माना जाता है। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई के साथ अन्य कानूनी कार्रवाई भी संभव है।
जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
फिलहाल पूरे मामले में विभागीय जांच जारी है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है। यदि जांच में बिना अनुमति पेड़ों की कटाई की पुष्टि होती है तो यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सरकारी संपत्ति के संरक्षण से जुड़े नियमों के उल्लंघन का गंभीर विषय बन सकता है। जांच पूरी होने के बाद विभाग जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई करता है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।
(नोट: इस समाचार में लगाए गए आरोप शिकायत और प्रारंभिक जानकारी पर आधारित हैं। विभागीय जांच जारी है। अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा।)



