
रायपुर, 23 जुलाई 2026 | Khabar36
छत्तीसगढ़ सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने और ग्रामीण व दूरस्थ क्षेत्रों के अस्पतालों में चिकित्सकीय एवं पैरामेडिकल कर्मचारियों की कमी को दूर करने के उद्देश्य से डॉक्टरों एवं स्वास्थ्य कर्मचारियों के संलग्नीकरण (अटैचमेंट) की व्यवस्था समाप्त करने का निर्णय लिया है। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने स्पष्ट किया है कि प्रतिनियुक्ति और अटैचमेंट पर कार्यरत सभी अधिकारी एवं कर्मचारियों को उनके मूल पदस्थापना स्थल पर लौटना अनिवार्य होगा, ताकि जहां उनकी वास्तविक आवश्यकता है वहां स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर ढंग से संचालित हो सकें।
राज्य शासन के इस फैसले को ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। लंबे समय से यह शिकायत मिल रही थी कि कई डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारी मूल पदस्थापना वाले अस्पतालों में सेवाएं देने के बजाय जिला मुख्यालयों या संचालनालय में अटैच होकर कार्य कर रहे हैं, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों में मरीजों को पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही थीं।

सुशासन तिहार में भी दिए गए थे सख्त निर्देश
हाल ही में आयोजित सुशासन तिहार के दौरान भी स्वास्थ्य संचालनालय द्वारा प्रदेश के सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (CMHO) को स्पष्ट निर्देश जारी किए गए थे कि अटैचमेंट पर कार्यरत कर्मचारियों को तत्काल उनके मूल पदस्थापना स्थलों पर भेजा जाए।
निर्देशों में यह भी कहा गया था कि यदि आदेशों का पालन नहीं किया गया तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। शासन का उद्देश्य था कि प्रत्येक अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र में स्वीकृत पदों के अनुसार कर्मचारी उपलब्ध रहें और आम जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
विशेष परिस्थितियों में ही मिलेगी अनुमति
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल विशेष एवं अत्यावश्यक परिस्थितियों में ही विभागीय अनुमति के बाद अटैचमेंट जारी रखा जा सकेगा। अर्थात अब सामान्य प्रशासनिक सुविधा या व्यक्तिगत कारणों के आधार पर अटैचमेंट की व्यवस्था जारी नहीं रहेगी।
लेकिन स्वास्थ्य संचालनालय में अब भी नहीं हुई कार्रवाई!
इधर, शासन के स्पष्ट आदेशों के बावजूद संचालक स्वास्थ्य सेवाएं कार्यालय में स्थिति अलग दिखाई दे रही है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, विभिन्न जिलों से वर्षों से अटैच कई अधिकारी एवं कर्मचारी अब भी संचालनालय में कार्यरत हैं।
बताया जा रहा है कि अब तक इन कर्मचारियों का अटैचमेंट समाप्त करने संबंधी कोई व्यापक आदेश जारी नहीं किया गया है और न ही इन्हें उनके मूल पदस्थापना स्थलों पर वापस भेजने के लिए शासन को कोई प्रस्ताव भेजा गया है।
सूत्रों का यह भी कहना है कि संचालनालय में कार्यरत कई अधिकारी-कर्मचारी लंबे समय से सुविधाजनक पदस्थापन पर बने हुए हैं, जबकि उनके मूल अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में स्टाफ की कमी बनी हुई है।
उठ रहे हैं समान नियम लागू करने के सवाल
अब सवाल यह उठ रहा है कि जब जिला स्तर पर अटैच कर्मचारियों को मूल पदस्थापना पर भेजने के लिए सख्त निर्देश दिए जा चुके हैं, तो क्या वही नियम संचालनालय में कार्यरत अटैच अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी समान रूप से लागू होंगे?
स्वास्थ्य विभाग के जानकारों का मानना है कि यदि शासन वास्तव में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार चाहता है, तो सभी स्तरों पर एक समान नीति लागू करनी होगी। केवल जिलों में कार्रवाई और संचालनालय स्तर पर छूट जैसी स्थिति से शासन की मंशा पर भी सवाल उठ सकते हैं।
ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा असर
विशेषज्ञों का कहना है कि जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों एवं कर्मचारियों की कमी का एक बड़ा कारण वर्षों से जारी अटैचमेंट व्यवस्था भी रही है। यदि सभी अधिकारी-कर्मचारी अपने मूल पदस्थापना स्थलों पर लौटते हैं तो ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आने की उम्मीद है।
अब सबकी नजर शासन के अगले कदम पर
स्वास्थ्य मंत्री की घोषणा और पूर्व में जारी आदेशों के बाद अब प्रदेशभर के स्वास्थ्य कर्मियों और आम जनता की नजर इस बात पर है कि संचालक स्वास्थ्य सेवाएं कार्यालय में वर्षों से अटैच अधिकारी एवं कर्मचारियों को आखिर कब उनके मूल पदस्थापना स्थलों पर वापस भेजा जाएगा।
यदि शासन अपने आदेशों को सभी स्तरों पर समान रूप से लागू करता है, तो यह न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता का संदेश देगा बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को भी नई मजबूती मिल सकती है।
(नोट: संचालनालय में अटैच अधिकारियों एवं कर्मचारियों से संबंधित दावे विभागीय सूत्रों और उपलब्ध प्रशासनिक जानकारी पर आधारित हैं। यदि विभाग की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या आदेश जारी होता है, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)


