
राजनांदगांव -साइबर ठगी के मामलों में समय पर शिकायत करना कितना कारगर साबित हो सकता है, इसका उदाहरण राजनांदगांव में सामने आया है। यूट्यूब पर फॉलोअर्स बढ़ाने के नाम पर ठगी के शिकार हुए एक युवक को साइबर थाना राजनांदगांव की त्वरित कार्रवाई से उसकी ठगी गई रकम में से ₹41 हजार वापस मिल गए हैं।
जानकारी के मुताबिक, रतनाकर द्विवेदी, उम्र 33 वर्ष, निवासी बसंतपुर, हाल पैण्ड्री, के साथ 3 जनवरी 2026 को साइबर ठगी हुई थी। अज्ञात लिंक पर क्लिक करने के बाद आरोपियों ने यूट्यूब पर फॉलोअर्स बढ़ाने के नाम पर पहले ₹2 हजार जमा करवाए। इसके बाद रकम रिफंड होने का झांसा देकर अलग-अलग तरीके से कुल ₹42 हजार की ठगी कर ली गई।
पीड़ित ने मामले की शिकायत तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 के माध्यम से की। शिकायत के बाद साइबर पुलिस पोर्टल के जरिए ठगी की रकम को ट्रेस करते हुए ₹41 हजार होल्ड कर दिए गए।
MRM पोर्टल से हुई रकम वापसी की कार्रवाई
संबंधित बैंकों द्वारा MRM पोर्टल पर ₹41 हजार की रिस्टोरेशन मनी प्रदर्शित किए जाने के बाद साइबर थाना राजनांदगांव ने पीड़ित को 7 अगस्त 2026 को थाने बुलाया। निर्धारित दस्तावेज और प्रोफार्मा की प्रक्रिया पूरी कराई गई तथा ₹10 के स्टाम्प पेपर पर नोटरीकृत एफिडेविट लिया गया।
इसके बाद धारा 106 बीएनएसएस के तहत संबंधित बैंक को पोर्टल के माध्यम से नोटिस भेजकर रकम वापसी की कार्रवाई आगे बढ़ाई गई। प्रक्रिया पूरी होने के बाद 10 अगस्त 2026 को ₹41 हजार पीड़ित के बैंक खाते में वापस आ गए।
साइबर थाना राजनांदगांव ने बैंक द्वारा रिस्टोरेशन मनी की जानकारी पोर्टल पर उपलब्ध कराने के बाद महज चार दिन के भीतर पीड़ित को ठगी की रकम वापस दिलाने में सफलता हासिल की।
अप्रैल 2026 से MRM और GRM पोर्टल की नई व्यवस्था
गृह मंत्रालय, भारत सरकार और I4C नई दिल्ली द्वारा साइबर पुलिस पोर्टल पर अप्रैल 2026 से MRM एवं GRM पोर्टल की नई व्यवस्था शुरू की गई है। इसका उद्देश्य साइबर ठगी में फंसी रकम को जल्द ट्रेस कर होल्ड करने और निर्धारित प्रक्रिया के तहत पीड़ित तक वापस पहुंचाना है।
साइबर ठगी होने पर क्या करें?
साइबर पुलिस के मुताबिक ठगी का शिकार होने पर पीड़ित को बिना देरी किए 1930 पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए। यदि हेल्पलाइन के माध्यम से शिकायत दर्ज नहीं हो पाती है तो नजदीकी थाना अथवा साइबर थाना पहुंचकर साइबर पुलिस पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
शिकायत दर्ज होने के बाद पीड़ित को मोबाइल पर Acknowledgement Number प्राप्त होता है। साइबर पुलिस पोर्टल के माध्यम से ठगी की रकम को लेयर-टू-लेयर ट्रेस कर संबंधित बैंक खातों में उपलब्ध रकम को होल्ड/लीन करने की प्रक्रिया शुरू होती है।
इसके बाद संबंधित बैंकों से रिस्टोरेबल मनी की जानकारी MRM पोर्टल पर उपलब्ध होती है और नियमानुसार पुलिस द्वारा दस्तावेज, बंधपत्र तथा आवश्यक नोटिस की प्रक्रिया पूरी कर रकम वापसी की कार्रवाई की जाती है।
₹50 हजार तक की रकम में थाने स्तर से कार्रवाई
साइबर पुलिस के अनुसार, यदि होल्ड रकम ₹50 हजार से कम है तो संबंधित पुलिस थाना निर्धारित प्रक्रिया के तहत रकम वापसी की कार्रवाई कर सकता है। वहीं ₹50 हजार से अधिक रकम होने पर अपराध पंजीबद्ध कर न्यायालय से आवश्यक आदेश प्राप्त करने के बाद रकम वापसी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है।
पुलिस की अपील
साइबर थाना राजनांदगांव ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, सोशल मीडिया पर फॉलोअर्स, लाइक्स, पार्ट-टाइम जॉब, निवेश या रिफंड के नाम पर किसी अज्ञात व्यक्ति के कहने पर पैसे ट्रांसफर न करें। साइबर ठगी होने पर गोल्डन ऑवर में 1930 पर शिकायत करना रकम बचाने में बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
साइबर ठगी में देरी नहीं, तुरंत 1930 पर शिकायत — यही रकम बचाने का सबसे बड़ा हथियार है।

संदीप शर्मा
संस्थापक एवं संचालक — Khabar36 News
📰 मीडिया अनुभव: 4+ वर्ष
🤝 अनुभव: Buland Media एवं Buland Chhattisgarh से जुड़ाव
✍️ भूमिका: पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया संचालक
🎯 विशेषता: तथ्यपरक, निष्पक्ष एवं जनहित आधारित पत्रकारिता
संदीप शर्मा का उद्देश्य विश्वसनीय खबरों के माध्यम से जनता की आवाज़ को मजबूती से सामने लाना और पत्रकारिता में तथ्य एवं जनहित को प्राथमिकता देना है।



